आंधी की तरह आई थी
वीराने-से मेरे जीवन में
और खुशबू की फिज़ा बनी
मेरे सूने-से आँगन में.
मेरे ह्रदय में खिले सुमन
जैसे वसंत में खिले पलाश.
देखे तेरे चंचल नयन
तुमने बाँधा इक प्रेम-पाश.
जैसे वर्षा की हो फुहार
तेरी बोली में था वो प्यार.
तर कर दे सूखे हिय को
जैसे घन हो जीवन-सार.
तेरे रूप की ज्योति से
उजियाला-सा इक छा जाये,
जैसे मेघाच्छादित नभ में
फिर पीला सूरज आ जाये.
